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म्यूचुअल फंड के साथ स्मार्ट रिटायरमेंट प्लानिंग

आमतौर पर, हममें से अधिकांश लोगों के लिए रिटायरमेंट के लिए एक्शन प्लान होने का मतलब एक ईपीएफ अकाउंट या अपना एक अलग पीपीएफ अकाउंट होना ही है. अब जबकि हमारे माता-पिता के समय की तुलना में ज़माना काफी आगे निकल गया है, ये पारंपरिक निवेश के तरीके भी पुराने हो गए हैं. आने वाली रिटायरिंग जनरेशन पूरी तरह से ईपीएफ के निवेश पर निर्भर होगी, जिसमें पेंशन मिलने की कोई उम्मीद नहीं होगी. अगर कोई व्यक्ति अपने रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त धन एकत्र नहीं करता है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि वह केवल सेविंग इनकम पर आने वाले ब्याज से अपना घर खर्च नहीं चला पाएगा.

एक सर्वेक्षण के अनुसार, संयुक्त राज्य जैसे विकसित देशों में 75% से अधिक परिवार, रिटायरमेंट के बाद की इनकम के लिए म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं, तो भारत के लोग इस प्रकार के निवेश के प्रति आशंकित क्यों रहते हैं? आइए जानते हैं कि म्यूचुअल फंड आपको अपने रिटायरमेंट को स्मार्ट रूप से प्लान करने में कैसे मदद कर सकते हैं.

  • अगर आप रिटायरमेंट के लिए निवेश करने जा रहे हैं, तो निवेश के शुरुआती वर्षों में इक्विटी के क्षेत्र में उचित मात्रा में निवेश सुनिश्चित करें, और बाद में धीरे-धीरे डेट फंड या पारंपरिक सेविंग विकल्पों की तरफ शिफ्ट करें. अगर आप 15-20 वर्षों के लिए निवेश कर रहे हैं, तो आप शिफ्टिंग प्रोसेस अपने रिटायरमेंट से 5 वर्ष पहले भी शुरू कर सकते हैं. इसके अलावा, 15 वर्ष या उससे अधिक के निवेश के लिए, स्टॉक मार्केट से नकारात्मक रिटर्न प्राप्त करने की संभावनाएं न्यूनतम होती हैं. इसलिए, आपका पैसा सुरक्षित रहता है और इक्विटी के माध्यम से आप मार्केट लिंक्ड रिटर्न भी प्राप्त कर सकते हैं.

  • अपने फंड पोर्टफोलियो को हर साल रिबैलेंस करने की कोशिश करें. इसका मतलब है कि आपको नियमित रूप से अपने पोर्टफोलियो में डेट, इक्विटी और गोल्ड के निवेश को रिबैलेंस करना होगा. एक विविध पोर्टफोलियो, विभिन्न प्रकार की एसेट कैटेगरी के लिए एक्सपोज़र प्रदान करता है, जिसमें ईपीएफ, पीपीएफ, अन्य डेट विकल्प और म्यूचुअल फंड शामिल हैं.
  • अगर आपके पास रिटायरमेंट के बाद म्यूचुअल फंड हैं, तो अपनी मासिक इनकम के लिए उनके लाभांश पर पूरी तरह से निर्भर न रहें. अपना खुद का वार्षिक प्लान बनाने के लिए सिस्टमेटिक विड्रॉल प्लान (एसडब्ल्यूपी) लें. अगर डेट फंड को एक वर्ष से अधिक समय के लिए होल्ड किया जाता है, तो यह बहुत ही टैक्स कुशल विकल्प के रूप में काम करता है.
  • आपके रिटायरमेंट प्लान लिए म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो बिना किसी फैन्सी सेक्टर या विशेष थीम के भी बनाया जा सकता है. एक निवेशक के रूप में अगर आप इस प्रकार का एक्सपोज़र चाहते हैं, तो आपको इसे 10% तक सीमित करना चाहिए और अपने रिटायरमेंट से कुछ वर्ष पहले ऐसे थीम से बाहर निकलना सुनिश्चित करना चाहिए.

इन बातों का पालन करने से आपको बिना अधिक खर्च किए अपने लिए रिटायरमेंट फंड बास्केट को बनाने में मदद मिल सकती है. कोई भी निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल सलाहकार से सलाह ज़रूर लें.

डिस्क्लेमर
यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य पढ़ने के उद्देश्य से है तथा यहां व्यक्त किए गए विचार केवल राय हैं और इसलिए इन्हें पाठकों के लिए दिशानिर्देश, सिफारिश या प्रोफेशनल गाइड के रूप में नहीं माना जा सकता है. इंडस्ट्री और मार्केट से संबंधित कुछ तथ्य और सांख्यिकीय जानकारी (ऐतिहासिक और अनुमानित) स्वतंत्र थर्ड पार्टी स्रोतों से प्राप्त की गई हैं, जिन्हें विश्वसनीय समझा जाता है. यहां यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि, क्योंकि एनएएम इंडिया (पूर्व में रिलायंस निप्पॉन लाइफ एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड) ने ऐसी जानकारी या डेटा की सटीकता या प्रामाणिकता को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया है, या इस मामले में ऐसे डेटा और जानकारी को प्रोसेस या प्राप्त की गई धारणाओं के उचित होने का सत्यापन नहीं किया है; इसलिए एनएएम इंडिया (पूर्व में रिलायंस निप्पॉन लाइफ एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड) ऐसे डेटा और जानकारी की सटीकता या प्रामाणिकता के लिए किसी भी तरह से ज़िम्मेदार या उत्तरदाई नहीं है. इस सामग्री में शामिल कुछ स्टेटमेंट और दावे एनएएम इंडिया (पहले रिलायंस निप्पॉन लाइफ एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड) के विचार या राय दर्शा सकते हैं, जो इस तरह के डेटा या जानकारी के आधार पर बनाए गए हों.

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म्यूचुअल फंड निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन हैं, स्कीम से जुड़े सभी दस्तावेज़ों को ध्यान से पढ़ें.


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