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ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड- चुनने से पहले जानें

सारांश: म्यूचुअल फंड आपके फाइनेंशियल लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, आपके फंड को चैनलाइज़ करने का बेहतरीन इन्वेस्टमेंट विकल्प हैं. यह बेहतर फंड के लिए किए गए इन्वेस्टमेंट का एक कलेक्टिव फंड है. इसमें कई प्रकार की फंड स्कीम शामिल होती हैं. ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड आसानी से लिक्विडिटी प्रदान करता है और इन्वेस्टर के बीच काफी प्रसिद्ध है. लेकिन, अपनी म्यूचुअल फंड स्कीम चुनने से पहले, उसकी पॉलिसी/स्कीम के बारे में अच्छी तरह जान लें

म्यूचुअल फंड, जैसा कि हम सभी जानते हैं, सामान्य फाइनेंशियल लक्ष्यों को शेयर करने वाले इन्वेस्टर द्वारा इकट्ठा की गई पूंजी का एक संग्रह है. यहां इन्वेस्टर कोई भी हो सकता है, चाहे वह व्यक्ति हो, फर्म हो या काेई अन्य फाइनेंशियल संस्थान. यह ऐसा कलेक्टिव फंड है, जिसे कई तरीके से संचित और इन्वेस्ट किया जाता है. इन फंड को अच्छी तरह से मैनेज करने के लिए, फंड मैनेजर होते हैं, जो पैसे को अलग-अलग इन्वेस्टमेंट के प्रकार, जैसे कि स्टॉक, इक्विटी बॉन्ड आदि में जमा करते हैं. विभिन्न प्रकार के मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट में पैसे इन्वेस्ट किया जाना, जोखिम कम करने में मदद करता है. इसलिए, जब एक इन्वेस्टमेंट अच्छा रिटर्न न दे रहा हो, तो उसकी जगह दूसरा इन्वेस्टमेंट बेहतर परफॉर्म करके कुल रिटर्न को बैलेंस कर सकता है. और इस प्रकार, कुल अर्जित रिटर्न को इन्वेस्टर के मूल इन्वेस्टमेंट के हिसाब से विभाजित और डिस्ट्रीब्यूट किया जाता है.

फिलहाल म्यूचुअल फंडका वर्गीकरण कई मानदंडों पर निर्भर करता है, जैसे कि इन्वेस्टमेंट की प्रकृति, जोखिम की संभावना, भुगतान की अवधि या मेच्योर होने का समय. बंद (मेच्योर) होने के समय के आधार पर म्यूचुअल फंड 2 प्रकार के होते हैं, ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड और क्लोज़्ड एंडेड म्यूचुअल फंड. इन दोनों के बीच का अंतर बिक्री में आसानी और फंड यूनिट की खरीद पर आधारित है. इसलिए, ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टर अपनी सुविधा के अनुसार कभी भी यूनिट जारी या रिडीम कर सकते हैं, वहीं क्लोज्ड एंडेड म्यूचुअल फंड में यूनिट पूंजी फिक्स होती है और केवल कुछ खास संख्या में यूनिट की बिक्री की अनुमति होती है.

हालांकि ओपन एंडेड म्यूचुअल फंडके मामले में उपलब्ध सुविधा के कारण यूनिट की पूंजी बदलती रहती है और फंड के साइज़ में बढ़ोतरी देखी जा सकती है. अगर मैनेजमेंट बड़े साइज़ के फंड को नहीं संभाल पाता है और ऑप्टिमाइज़ नहीं कर पाता है, तो सब्सक्रिप्शन को आसानी से रोका जा सकता है. जबकि क्लोज्ड एंडेड फंड में खरीद और बिक्री, उस मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से होती है, जहां स्कीम की यूनिट को सूचीबद्ध किया गया है. लेकिन इन्वेस्टर को बाहर निकलने की अनुमति देने के लिए, संबंधित फंड अपनी क्लोज्ड एंडेड स्कीम को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कर सकता है.

ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड में बहुत अधिक लिक्विडिटी उपलब्ध होती है और इन्वेस्टर दैनिक आधार पर घोषित नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) पर यूनिट खरीद या बेच सकते हैं. दूसरी ओर, क्लोज्ड एंडेड फंड में सब्सक्रिप्शन केवल खास अवधि के दौरान ही खुला रहता है और इस फंड से बाहर निकलने के विकल्प भी सीमित हैं. इन फंड का नियमित आधार पर अचानक रिडेम्पशन नहीं होता है. फंड मैनेजर को भी क्लोज्ड एंडेड फंड में आसानी होती है. इसलिए, जब भी आप म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट करें, तो स्कीम के डॉक्यूमेंट को स्पष्ट रूप से पढ़ें. अगर आप फिर भी तय नहीं कर पाते हैं कि किस स्कीम को लेना है, तो इन्वेस्टमेंट के जानकार से सहायता लें

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म्यूचुअल फंड निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन हैं, स्कीम से जुड़े सभी दस्तावेज़ों को ध्यान से पढ़ें.

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